Shayari

एक लम्हा

तुम्हारे..
एक लम्हें पर भी मेरा हक़ नहीं…
ना जाने…

तुम किस हक़ से मेरे हर लम्हें में शामिल हो..✍🏻

0
Loading Likes...

Leave a Reply