Love Poems

Gazal

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न जाने क्यूँ मुझे तुम्हीं पे प्यार आता है
ये दिल पागल है तुझे जो इतना चाहता है ..

यूँ तुझसे रोज़ झगड़ने में मजा आता है
तेरे सिवा मुझे कोई और नहीं भाता है ……

मेरी बिंदिया में सजना तू टिमटिमाता है
की बनके आँखों का काजल तू बिखर जाता है ………

तेरा ही प्यार मेरे जिस्म को महकाता है
मेरे लबों पे तू मुस्कान बनके छाता है ………

मेरी चूड़ी मेरे कंगन तू ही खनकाता है
तेरे साये में रूप और भी खिल जाता है …..

नेहा के दिल में धड़कनों में तू समाता है
मेरी ग़ज़लों में सभी को तू नज़र आता है ..

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